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Sanju Samson: विश्व कप हीरो संजू सैमसन जिम्बाब्वे दौरे की टीम से बाहर, चयनकर्ताओं के फैसले पर उठे सवाल

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Alam Ki Khabar: टी20 विश्व कप 2026 में भारत की जीत के हीरो रहे संजू सैमसन को जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम में जगह नहीं मिली। तीन पारियों और सिर्फ 12 गेंदों के प्रदर्शन के बाद चयनकर्ताओं के फैसले पर बहस तेज हो गई है।

टी20 विश्व कप 2026 में भारत को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन एक बार फिर चयनकर्ताओं के फैसले के केंद्र में हैं। जिम्बाब्वे दौरे के लिए घोषित भारतीय टीम में उनका नाम शामिल नहीं किए जाने के बाद क्रिकेट जगत में नई बहस छिड़ गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सिर्फ तीन पारियों और 12 गेंदों के प्रदर्शन के आधार पर विश्व कप विजेता खिलाड़ी को टीम से बाहर करना उचित फैसला है, या फिर चयन समिति पूरी टीम को कड़ा संदेश देना चाहती है।

विश्व कप के दौरान जब भारतीय बल्लेबाजी दबाव में थी, तब टीम प्रबंधन ने संजू सैमसन पर भरोसा जताया। सैमसन ने इस भरोसे को शानदार बल्लेबाजी से सही साबित करते हुए लगातार तीन मैचों में नाबाद 97, 89 और 89 रन की मैच जिताऊ पारियां खेलीं। सेमीफाइनल और फाइनल जैसे अहम मुकाबलों में भी उन्होंने व्यक्तिगत उपलब्धि से ऊपर टीम के लक्ष्य को रखा और तेज रन बनाने के प्रयास में अपना विकेट गंवाया। उनकी निडर बल्लेबाजी भारत की खिताबी जीत की सबसे बड़ी वजहों में गिनी गई।

हालांकि विश्व कप के बाद आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्हें केवल तीन पारियां खेलने का मौका मिला, जिनमें उन्होंने 5, 0 और 1 रन बनाए। इन तीन पारियों में उन्होंने कुल 12 गेंदों का सामना किया। इसके बाद चौथे मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका दिया गया। इसके कुछ ही समय बाद जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम घोषित हुई और उसमें भी संजू सैमसन का नाम नहीं था।

चयनकर्ताओं के इस फैसले पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि हालिया श्रृंखला में कई अन्य बल्लेबाज भी बड़ी पारियां खेलने में सफल नहीं रहे, लेकिन उन्हें टीम में बरकरार रखा गया। ऐसे में क्रिकेट विशेषज्ञ यह जानना चाहते हैं कि क्या प्रदर्शन का एक ही पैमाना सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू किया गया है या नहीं।

मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति पिछले कुछ समय से बड़े फैसले लेने के लिए चर्चा में रही है। कई वरिष्ठ खिलाड़ियों को भी चयन के दौरान बाहर का रास्ता दिखाया गया है। लेकिन संजू सैमसन का मामला इसलिए अलग माना जा रहा है क्योंकि वह हाल ही में विश्व कप जीताने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं।

टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर लगातार आक्रामक और निडर क्रिकेट खेलने की वकालत करते रहे हैं। उनका मानना रहा है कि बल्लेबाजों को बिना दबाव के टीम के लिए खेलना चाहिए। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तीन खराब पारियों के बाद ही खिलाड़ी टीम से बाहर होने लगेंगे तो बल्लेबाज जोखिम लेने से बच सकते हैं और इससे टीम की आक्रामक सोच पर असर पड़ सकता है।

सोशल मीडिया पर एक और चर्चा उस समय शुरू हुई जब संजू सैमसन ने एक इंटरव्यू में महेंद्र सिंह धोनी को अपना सबसे बड़ा आदर्श बताया। इसके बाद कुछ लोगों ने इसे चयन से जोड़कर देखा, हालांकि इस बात का कोई आधिकारिक आधार या प्रमाण नहीं है। टीम चयन को प्रदर्शन और टीम संयोजन के आधार पर ही माना जाता है।

क्रिकेट जानकारों का मानना है कि भारतीय टी20 टीम में इस समय बाएं हाथ के बल्लेबाजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में संजू सैमसन जैसे अनुभवी दाएं हाथ के बल्लेबाज का बाहर होना टीम संतुलन पर भी असर डाल सकता है। मध्यक्रम में तेजी से रन बनाने की उनकी क्षमता कई बार टीम के लिए मैच जिताऊ साबित हुई है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि विश्व कप में लगातार तीन मैच जिताने वाले बल्लेबाज के लिए क्या सिर्फ तीन खराब पारियां और 12 गेंदों का प्रदर्शन इतना बड़ा कारण बन सकता है कि उन्हें टीम से ही बाहर कर दिया जाए। चयनकर्ताओं के इस फैसले पर आने वाले दिनों में बहस और तेज होने की संभावना है।

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विश्व कप का नायक, क्या इतनी जल्दी भुला दिया गया?

क्रिकेट में प्रदर्शन ही चयन का सबसे बड़ा आधार माना जाता है, लेकिन किसी खिलाड़ी का मूल्यांकन केवल तीन पारियों से करना उचित नहीं कहा जा सकता। यदि टीम प्रबंधन खिलाड़ियों से निडर क्रिकेट की उम्मीद करता है तो उन्हें असफल होने का भी पर्याप्त अवसर देना होगा। संजू सैमसन का मामला भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ गया है—क्या लगातार सफलता के बाद भी खिलाड़ियों की जगह इतनी असुरक्षित रहनी चाहिए कि तीन खराब पारियां उनका पूरा सफर बदल दें?

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